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पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

पृथ्वी की आंतरिक संरचना

हेल्लो दोस्तों आज हम आपके लिए पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आये हे | यह हर तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहोत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है| पृथ्वी की आंतरिक संरचना के प्रश्न अकसर  SSC CGL, SSC CHSL, BANK, FCI, CAPF, SI, MPPSC, MPSI, UPPCS, RAILWAY और हर तरह की प्रतियोगिता परीक्षा में पूछे जाते है |

(Earth Internal Structure Notes in Hindi)

पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी :

पृथ्वी की आन्तरिक संरचना की बात करे तो पृथ्वी की आन्तरिक संरचना की सही जानकारी प्राप्त करना अभी संभव ही नहीं हुआ पाया क्योंकि पृथ्वी के आन्तरिक भाग को मानव ने कभी देखा ही नहीं है| आफ्रिका के जो सोने के खजाने है वो बी ३ से ४ मीटर गहरी है इससे ज्यादा गहराई में जाना अभी तक संभव ही नहीं पाया क्योंकि जैसे जैसे पृथ्वी की गहराई में जाते है वैसे ही तापमान बढ़ने लगता है |आजतक का सबसे बड़े ड्रिल की बात करे तो आर्कटिक महासागर के कोला क्षेत्र में 12 km की गहराई तक ही वो ड्रिल हो पाया है और ज्वालामुखी भी जो है हमे 60 km की गहराई से ज्यादा जानकारी नही देते है |

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भू वैज्ञानिको ने बहोत से स्त्रोतों की मदद से पृथ्वी की आन्तरिक संरचना का अनुमान लगाया है जैसे की 

  1. प्राकृतिक स्त्रोत
  2. अप्राकृतिक स्त्रोत

1. प्राकृतिक स्त्रोत : 

  • ज्वालामुखी उदगार से
  • भूकंप विज्ञान (seismology) से  : भूकंप विज्ञान(seismology) ये एक मात्र एसा स्त्रोत है जिसके अंतर्गत भूकंपी तरंगो की मदद से पृथ्वी की आन्तरीक भाग का अनुमान लगाया जाता है |

2. अप्राकृतिक स्त्रोत :

  • Density
  • Pressure
  • Temperature

Density : एक निश्चित Area में मतलब एक निश्चित Volume में किसी material का वजन जितना होगा वो उसकी Density होती है| Density का relation pressure से होता है | density अगर बढ़ती है तो pressure भी बढ़ता है| और pressure का relation डायरेक्टली temperature से होता है | pressure बढेगा तो temperature भी बढेगा |

  • वैज्ञानिको ने देखा की पृथ्वी के बाहरी सतह से आन्तरिक सतह की और जाने पर धनत्व में वृद्धि होती है
  • पृथ्वी के अन्दर जाने पर density बढ़ रही मतलब pressure भी बढेगा, इससे पता चलता है की पृथ्वी का आन्तरिक भाग भारी धातुओ से बना है |
  • पृथ्वी की सतह से आन्तरिक भाग की और जाने पर प्रति 32m पर 1° c की वृद्धि होती है |

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पृथ्वी का आन्तरिक भाग 3 भाग से मिलकर बना है :

  1. क्रस्ट / भू पर्पटी
  2. मेण्टल
  3. क्रोड़
1. क्रस्ट :

ये ठोस परत पृथ्वी का सबसे बाहरी भाग होता है | क्रस्ट की मोटाई महासागरों और महाद्वीपों पे अलग अलग होती है, महासागरों में कम और महाद्वीपों पे ज्यादा होती है | क्रस्ट का निर्माण सिलिका और एल्युमिनियम से हुआ है, इसलिए इस परत को सियाल(sial) कहा जाता है |इस परत को लिथोस्फियर (Lithosphere) भी कहा जाता है इस परत का धनत्व 2.75 से 2.90 तक है |

2. मेण्टल :

क्रस्ट के निचले भाग को मेण्टल कहा जाता है | पृथ्वी के आयतन का 83% तथा द्रव्यमान का 67% भाग यही होता है | मेण्टल का निर्माण सिलिका और मैगनीशियम से हुआ है, इस लिए इस परत को सीमा (SiMa) कहा जाता है | इस परत को पाईरोस्फियर (pyrosphere) भी कहा जाता है इस परत का धनत्व 2.90 से 4.75 तक है | इसे ही व्हाइट ऑफ़ द अर्थ कहा जाता है |

3. क्रोड़ :

मेण्टल के निचले भाग को क्रोड़ कहा जाता है,ये भाग पृथ्वी के निचले मेण्टल से पृथ्वी के केंद्र तक है | इसका निर्माण मुख्य रूप से निकिल और लोहे से हुआ है इसलिए इसे निफे (NiFe) परत कहते है | पृथ्वी के अन्दर जाने पर तापमान से ज्यादा दाब अधिक हो जाता है, इसी वजह से पृथ्वी का क्रोड़ ठोस अवस्था में है | इस परत को बैरिस्फियर (Barysphere) भी कहा जाता है |  इस परत का धनत्व 11 से 13 तक है |

Note : आस्ट्रिया के भू वैज्ञानिक स्वेस ने ही पृथ्वी की आन्तरिक संरचना को तीन परत सियाल, सीमा, और निफे के माध्यम से समजाया है |

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